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*पराली न जलाएं, खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं – उप कृषि निदेशक ने किसानों को दी चेतावनी, 30 हजार तक जुर्माने का प्रावधान*
✍️ *भास्कर न्यूज़ टुडे* ✍️
*प्रधान संपादक- आर के कश्यप*
*रामपुर, 05 अक्टूबर 2026।* 👉जनपद में धान और गन्ने की कटाई का सीजन शुरू होते ही कृषि विभाग अलर्ट हो गया है। उप कृषि निदेशक राम किशन सिंह ने किसानों से पराली न जलाने की अपील करते हुए कहा कि पराली जलाना खेत और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद नुकसानदायक है।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने से खेत की मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश जैसे उपयोगी पोषक तत्व पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है और अगली फसल की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। साथ ही इससे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ाता है, जिससे मानव, पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, आंखों में जलन, सांस की बीमारी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
👉*ऐसे करें प्रबंधन:*
उप कृषि निदेशक ने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों से पराली प्रबंधन की सलाह दी। किसान सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रा चॉपर, जीरो ड्रिल, रोटावेटर और एमबी प्लाऊ से फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंधन कर सकते हैं। पराली को खेत में मिलाकर यूरिया का छिड़काव और हल्की सिंचाई करने से यह 20-25 दिन में सड़कर उत्तम जैविक खाद में बदल जाती है, जिससे यूरिया-डीएपी की लागत भी कम होती है।
👉*गौशाला में करें दान:*
किसान चाहें तो पराली को नजदीकी गौशाला में दान कर सकते हैं या बेलर संचालकों के माध्यम से निःशुल्क उठवा सकते हैं, जहां से इसकी गांठें बनाकर अन्य उपयोग में लाया जाता है।
👉*जुर्माने का प्रावधान:*
उप कृषि निदेशक ने स्पष्ट किया कि पराली जलाना दण्डनीय अपराध है। शासन के निर्देश पर 2 एकड़ तक 5 हजार, 2 से 5 एकड़ तक 10 हजार और 5 एकड़ से अधिक पर 30 हजार रुपये तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूल की जाएगी। बार-बार घटना दोहराने पर सरकारी योजनाओं, अनुदान और सब्सिडी से वंचित करने के साथ एफआईआर तक की कार्रवाई हो सकती है।
उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि वे जागरूक बनें, पराली न जलाएं और मिट्टी की सेहत व पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।
































