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*यह ज्ञापन नहीं, हिन्दू समाज की हुंकार है” — बांग्लादेश में अत्याचारों के खिलाफ रामपुर में उठा आक्रोश*
✍️भास्कर न्यूज़ टुडे✍️
👁️प्रधान संपादक👁️
👁️आर के कश्यप👁️
रामपुर। बांग्लादेश में हिन्दू समाज पर हो रहे कथित संगठित अत्याचार, हिंसा और नरसंहार के विरोध में राष्ट्रीय हिंदू जागृति संघ ने जिलाधिकारी के माध्यम से भारत सरकार को एक कड़ा और भावनात्मक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बांग्लादेश में रह रहे हिन्दुओं की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे केवल एक प्रशासनिक पत्र नहीं, बल्कि “करोड़ों हिन्दुओं की दबी हुई चीख और उबलते आक्रोश की अभिव्यक्ति” बताया गया।
संघ की ओर से दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि बांग्लादेश में हिन्दू होना आज अपराध बना दिया गया है। ज्ञापन के अनुसार वहाँ हिन्दुओं के घर जलाए जा रहे हैं, मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है, महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहे हैं और मासूम बच्चों तक को हिंसा से नहीं बख्शा जा रहा। संगठन ने इन घटनाओं को छिटपुट नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित, संगठित और सुनियोजित उत्पीड़न करार दिया है।
ज्ञापन में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया कि 1971 में जिस बांग्लादेश के निर्माण में भारत की निर्णायक भूमिका रही, वही देश आज हिन्दुओं के लिए असुरक्षित होता जा रहा है। संघ का कहना है कि वहाँ हिन्दुओं को या तो देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है या फिर भय और हिंसा के साए में जीवन जीने को विवश किया जा रहा है।
राष्ट्रीय हिंदू जागृति संघ ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए और इसे “मानवता के विरुद्ध सबसे बड़े अपराधों में से एक” बताया। संगठन ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि यदि अब भी इस मुद्दे पर ठोस और कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो यह न केवल बांग्लादेश में बसे हिन्दुओं के साथ विश्वासघात होगा, बल्कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज की भावनाओं पर भी गहरा आघात होगा।
ज्ञापन के माध्यम से भारत सरकार से पाँच प्रमुख मांगें रखी गईं कि बांग्लादेश सरकार को स्पष्ट और कठोर चेतावनी देकर हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार तत्काल रुकवाए जाएँ।अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेश को कटघरे में खड़ा किया जाए। इन घटनाओं को धार्मिक आधार पर होने वाला नरसंहार घोषित किया जाए।पीड़ित हिन्दू परिवारों की सुरक्षा, पुनर्वास और मुआवज़े की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यदि अत्याचार बंद नहीं होते हैं, तो भारत सरकार हर संभव कूटनीतिक और रणनीतिक विकल्प अपनाए।
ज्ञापन के अंत में संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह “हिन्दू समाज के सब्र की अंतिम रेखा” है और यदि दुनिया अब भी मौन रही, तो इतिहास इसे मानवता की सबसे बड़ी विफलताओं में गिनेगा।
राष्ट्रीय हिंदू जागृति संघ ने जिलाधिकारी से मांग की कि इस ज्ञापन को अविलंब भारत सरकार तक पहुँचाया जाए, ताकि बांग्लादेश में पीड़ित हिन्दू समाज को न्याय और सुरक्षा मिल सके। इस मौके पर कंचन सक्सेना, संजय शर्मा, सुधीर शर्मा, वेद आहूजा, विशाल गुप्ता, सुमित अरोड़ा, गीता अरोड़ा, सारिका रस्तोगी, सुखदेव मिश्रा मौजूद रहे
